Self-Help & Personal Growth
Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
by Rajeev Saxena
‘कैसी अजीब बात है ! हमारे जीवन के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण काम है, उसे हम दिमाग़ का इस्तेमाल किए बग़ैर करते रहते हैं। साँस लेने के लिए हमें सोचना नहीं पड़ता। तो साँस के बारे में हमें कोई ख़बर भी नहीं होती। क्या आप जानते हैं कि जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसके अच्छे या बुरे परिणामों के तार सीधे हमारी साँसों से जुड़े होते हैं ? चाहे कोई भी काम हो, उसे करते समय अगर हमारी साँस अनुकूल हो, तो उसमें हमें सफलता मिलती है। इसका उलटा हो तो असफलता। यह सब साँस में ज़रा से बदलाव से हो जाता है। हमारे सोचने-समझने, खाने-पीने, लाभ-हानि, प्रेम, चिंता, क्रोध, भय या बीमारी आदि हर चीज़ का सीधा कनेक्शन हमारी साँसों से होता है। मृत्यु के समय भी साँस के पीछे चलने वाली सूक्ष्म क्रियाओं की अहम् भूमिका होती है। यहां तक कि गर्भधारण के समय स्त्री और पुरुष की साँसें ही तय करती हैं कि संतान कैसी होगी? जबकि आध्यात्मिक यात्रा में चक्र साधना और ध्यान का घटित होना, केवल साँस के सूक्ष्म तत्वों पर ही निर्भर होता है। पूरी तरह प्रकृति प्रदत्त यह साँस का विज्ञान है। यह स्वत: अपना काम करता रहता है। जान लीजिए कि साँसों का सीधा सम्बंध सूर्य और चंद्रमा से होता है, जो न्यूटन के नियम जितना ही वैज्ञानिक है। प्रकृति की तरह ही साँसों के पीछे भी अनगिनत रहस्य छिपे हुए हैं, जो हैरान कर देते हैं। यह बेहद प्राचीन और दुर्लभ विद्या है। यह पुस्तक दिलचस्प अंदाज़ और सरल शब्दों में इसकी जानकारी देती है। तो अपनी साँसों की उपेक्षा न करें और जानें कि आपके जीवन में वे क्या चमत्कार कर सकती हैं।’
