Spiritual & Philosophy
Papa Aa Jao Aapki Bahut Yaad Aati Hai
by Dharmendra Kumar Bansal
पिता सिर्फ एक शब्द नहीं है यह नाम है उस जिम्मेदारी का है जो एक पिता जीवन भर हर एक दर्द को सहते हुए अपने बच्चों के लिए वह सारी खुशियाँ जमा करने की कोशिश करता है जिससे उसके बच्चों को जीवन में कोई तकलीफ ना हो। पिता का जीवन में क्या महत्व होता है, किस तरह एक पिता सारे दुःख-परेशानी अपने अंदर समेटकर मुस्कुराते हुए सारा जीवन अपने बच्चों को बनाने में तथा उन्हें सारी खुशियाँ देने में निकाल देते हैं।इस पुस्तक ‘‘पापा आ जाओ आपकी बहुत याद आती है’’ के माध्यम से मैं यही बताने की छोटी सी कोशिश की है। उम्मीद करता हूँ आपको यह छोटा सा प्रयास पसंद आएगा। आपका अपना धर्मेंद्र कुमार बंसल। धर्मेंद्र कुमार बंसल मैं धर्मेन्द्र कुमार बंसल यह अपनी पहली पुस्तक अपने पिताजी को समर्पित कर रहा हूँ जो मैंने उनकी याद में लिखने की एक छोटी सी कोशिश की है। इस पुस्तक को लिखने के लिए मुझे मेरी माँ और मेरी धर्मपत्नी ने काफी प्रोत्साहित किया। इस पुस्तक के माध्यम से मैंने यह बताने की कोशिश की है कि एक पिता के जाने से कैसे जीवन मैं एक खालीपन सा आ जाता है। कैसे एक पिता के रहने मात्रा से ही आप हमेशा ऊर्जा से भरे हुए रहते है। सिर्फ इतना ही नहीं पिता के चले जाने से जीवन में रिश्ते किस तरह बदल जाते हैं ये मैंने बहुत करीब से देखा है। जिस माँ के चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान सी रहती थी किस तरह वो मुस्कान कहीं खो जाती है पिता के जाने के बाद ये बता पाना बहुत मुश्किल है। अपने अनुभव एवं जीवन के खालीपन को मैंने आप सब के सामने लिखकर बताने की एक छोटी-सी कोशिश की है। यह मेरी पहली पुस्तक है उम्मीद करता हूँ आपको यह पसंद आएगी।
