Spiritual & Philosophy
Dainik Jeeven Mein Bhagwadgeeta
by Anandshree
सफलता और समृद्धि का नाता कहीं न कहीं मन नाम के मशीन से है। जो जब से होश संभाला है तब से निरन्तर चल रही है। इसी मन का नाता भगवद्गीता में दिए गए ज्ञान से है। आज के अर्जुन की व्यथा भी 5200 पूर्व के अर्जुन की तरह थी। उसमें भी राग, द्वेष, माया, असुरक्षा की भावना, डर, ईष्र्या, जलन, प्रेम तथा खुशी थी। आज का अर्जुन अपने कार्य में कुशल है, प्रोफेशनल है। घर-गृहस्थी संभालने वाला है। लेकिन वह भी कहीं न कहीं भावनात्मक युद्ध से घिरा है। इसे आज हम ‘‘इमोशनल ब्लाॅकेज’’ कहते है। इस ब्लाॅकेज को निकालना बहुत जरूरी है। इस पुस्तक में हम सीखेंगेः ऽ जीने के सच्चे सिद्धांतऽ भावनात्मक युद्ध कैसे जीते ऽ मनुष्य की अनजान, अद्भुद शक्तियाँऽ चुम्बकीय मन कैसे बने ताकि जो चाहे वह पाए ऽ मन जो मालिक बना है उसे अपना वफादार दास कैसे बनाएँ कर्मयोग, ज्ञान योग और भक्ति योग से परे एक रहस्यमय योग जो जीवन को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। इंसान अपने आपको जान........... आनंदश्री पेशे से स्वर्ण पदक प्राप्त मेकैनिकल इंजीनियर है। आपकी आध्यात्मिक यात्रा बचपन से ही शुरू हो गयी थी। पुस्तक लेखन, सेमिनार, वर्कशाॅप तथा पर्सनल काॅन्सेल्लिंग के उपरान्त उन्होंने संसार के दुःखमय होने का चित्राण देखा। भारत में महान ग्रन्थों को अभ्यास करके ही उन्होंने ‘‘दैनिक जीवन में भगवद्गीता’’ की रचना की। मन और गीता का एक अदृश्य सम्बन्ध हैं। इसी लिंक को जोड़ने का प्रयास आनंदश्री ने इस पुस्तक में किया है। हम सब अपने विचार, आदत, दृष्टिकोण तथा नजरिये को बदल कर अपना जीवन बदल सकते हैं।
